नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट बिहार के गोपालगंज जिले के मजिस्ट्रेट जी कृष्णैया की हत्या के मामले में पूर्व सांसद आनंद मोहन की अपील पर मंगलवार को फैसला सुनाया। शीर्ष कोर्ट ने कृष्णैया हत्याकांड में पूर्व सांसद आनंद मोहन की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी।
गौर हो कि पटना हाईकोर्ट ने इस हत्याकांड में आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।आनंद मोहन ने इस हत्याकांड में उन्हें उम्रकैद की सजा देने के अदालत के निर्णय को चुनौती दे र
खी थी। न्यायमूर्ति एके पटनायक और न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर की खंडपीठ इसके साथ ही आनंद मोहन की उम्र कैद की सजा को मृत्यु दंड में तब्दील करने और लवली आनंद सहित अन्य सभी अभियुक्तों को बरी करने के फैसले के खिलाफ बिहार सरकार की अपील पर भी निर्णय सुनाया।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी कृष्णैया की हत्या के जुर्म में निचली अदालत ने तीन अक्तूबर, 2007 को आनंद मोहन, पूर्व मंत्री अखलाक अहमद और अरफण कमार को मौत की सजा सुनाई थी।
अदालत ने आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद, मुन्ना शुक्ला, शशि शेखर और हरेन्द्र कुमार को उम्र कैद की सजा सुनायी थी। लेकिन पटना उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2008 में आनंद मोहन की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया था। उच्च न्यायालय ने इस हत्याकांड में अन्य सभी आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया था। कृष्णैया को हिंसक भीड़ ने पांच दिसंबर, 1994 को कार से बाहर खींच कर बुरी तरह पीटा था और इसके बाद उन्हें गोली मार दी गयी थी।




