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चिदंबरम की सफाई, महंगाई पर नहीं उड़ाया किसी का मजाक

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नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने बुधवार को सफाई दी कि उन्होंने महंगाई पर शहरी मध्य वर्ग का मजाक नहीं उड़ाया, बल्कि उन्होंने 'तथ्यात्मक' बात कही। उन्होंने कहा कि मीडिया ने उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया। चिदंबरम ने बयान जारी कर कहा है कि वह बेंगलुरु में मंगलवार को अपने संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक सवाल के जवाब में कही गई बात को गलत तरीके से पेश किए जाने से हैरान हैं।

बयान में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्री ने तथ्यात्मक बयान दिया। उन्होंने किसी का मजाक नहीं उड़ाया और न ही किसी की आलोचना की। उन्होंने केवल तथ्यात्मक बातें कही।

विदित को कि चिदंबरम ने बेंगलुरु में कहा था कि हम पानी की एक बोतल के लिए 15 रुपये देने को तैयार रहते हैं, जबकि चावल और गेहूं में प्रति किलोग्राम एक रुपये की वृद्धि भी हम बर्दाश्त करने को तैयार नहीं होते। उक्त बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए चिदंबरम ने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि के कारण पेट्रोल का मूल्य बढ़ाया गया था, लेकिन मध्य वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए इसे दो बार कम किया गया।

मीडिया पर चिदंबरम की बात को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए बयान में कहा गया है, मंत्री ने 'हम' शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने ऐसा नहीं कहा था कि 'वे महंगाई पर इतना हंगामा क्यों कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी नहीं कहा था कि महंगाई को लेकर किसी तरह की शिकायत की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह गरीब किसानों के हित में है।

चिदंबरम के हवाले से मीडिया में खबरें आई थीं कि जनता आइसक्रीम के लिए 20 रूपये देने को राजी है लेकिन गेहूं चावल की कीमत में एक रूपये की बढोतरी का विरोध करती है। गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बेंगलूरू में कल एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान गृह मंत्री ने आम आदमी पर बोझ से जुडे एक सवाल का जवाब देते वक्त आबादी के अलग अलग वगो’ और उन्हें फायदा पहुंचाने वाली स्कीमों का जिक्र किया था। गृह मंत्री ने कच्चे तेल की कीमतों का जिक्र किया था और कैसे सरकार पेट्रोल की कीमतों में पहली बढोतरी के लिए मजबूर हुई थी और किस तरह मध्यम वर्ग के फायदे के लिए उसने दो बार इसमें कमी की।

बयान में कहा गया कि चिदंबरम बेंगलूरू में दस जुलाई 2012 को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान संबद्ध सवाल और उसके जवाब को मीडिया द्वारा तोड मरोड कर पेश करने से न सिर्फ क्षुब्ध हैं बल्कि उन्हें इसकी नाराजगी भी है।

गृह मंत्री ने अपने जवाब में किसी का मजाक नहीं बनाया था । उन्होंने ‘ हम’’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने ऐसे शब्द नहीं इस्तेमाल किये थे कि ‘ वे (जनता) महंगाई को लेकर इतना शोर क्यों मचाते हैं।

 

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